दोस्तों इस आर्टिकल की शुरुआत करते हैं हम एक प्यार भरी "सत श्री अकाल" से क्योंकि आज हम इस पोस्ट में भी यही जानेंगे कि सत श्री अकाल का अर्थ क्या होता है। यह शब्द आपने बहुत बार सुना होगा।
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यह सिखों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है जो वह एक दूसरे को मिलते हुए बोलते हैं, और इस शब्द के उच्चारण के बाद अपनी बात चीत आगे बढ़ाते हैं। पंजाब में इस शब्द का इस्तेमाल लगभग हर एक शख्स द्वारा किया जाता है। तो चलिए जानते हैं कि "सत श्री अकाल का क्या अर्थ है।

सत श्री अकाल का अर्थ


इस लाइन का पूरा मतलब जानने से पहले हम इसके एक एक शब्द का मतलब जानेंगे जिससे हमको इस लाइन को समझने में आसानी होगी।

सत शब्द का अर्थ है सत्य।
श्री शब्द संस्कृत मूल का एक शब्द है जिसका इस्तेमाल सम्मान देने के लिए किया जाता है।
अकाल शब्द का अर्थ है जिसका कोई काल ना हो अर्थात इसमें ईश्वर का ज़िक्र किया जा रहा है।

यदि अब हम इस को समझे तो यहां पर "श्री अकाल" ईश्वर को कहा गया है और जब तीनों शब्दों को जोड़ा जाए तो इसका अर्थ होगा "ईश्वर सत्य है और अकाल है" ।

जैसे हिन्दू धर्म में "जय श्री राम" बोला जाता है वैसे ही सिख धर्म में "सत श्री अकाल" शब्द का इस्तेमाल किया जाता है।

"बोले सो निहाल सत श्री अकाल" का अर्थ


जैसे हम ने ऊपर देखा "सत श्री अकाल" का अर्थ वैसे ही सिख धर्म में एक नारा (लाइन) है "बोले सो निहाल सत श्री अकाल" अब इसका अर्थ हम जानते हैं। कई लोगों द्वारा इस को "जो बोले सो निहाल सत श्री अकाल" भी बोला जाता है लेकिन यह आगे का "जो" शब्द इसमें नही है, लेकिन इसके लगने से यह लाइन पर कोई खास फर्क भी पड़ता।

यहां हम आपको बता दें की निहाल का अर्थ आनंदित होना है, अब इस लाइन को देखें तो हमें इसका अर्थ साफ दिखाई दे रहा है इसमें यह कहा जा रहा है कि जो इस बात को (सत श्री अकाल) बोलेगा वह निहाल हो जाएगा अर्थात वह प्रसन्न रहेगा।

मतलब की जो इस बात को मानेंगे और बोलेगा की ईश्वर सत्य है और अकाल है वह हमेशा निहाल रहेगा खुश रहेगा।

दोस्तों हमने आपको बताया "बोले सो निहाल सत श्री अकाल का अर्थ" हम उम्मीद करते हैं कि आप इस लाइन का अर्थ अच्छे से समझ गए होंगे।